जिले के 48 हजार किसानों से 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदी का लक्ष्य
खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए बस्तर जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन प्रारंभ हो गई है । बस्तर में कुल 79 धान खरीदी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 48,536 पंजीकृत किसानों से लगभग 3 लाख 11 हजार मीट्रिक टन धान की अनुमानित खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। बस्तर में धान उपार्जन के पहले दिन 15 नवम्बर को दो किसानों ने धान विक्रय करने के लिए टोकन कटवाया और इन दोनों किसानों ने धान खरीदी केन्द्र पल्ली में 38 क्विंटल धान का विक्रय किया। राज्य शासन द्वारा किसानों से इस वर्ष 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी की जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करते हुए धान का 3100 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान बेचने की सहूलियत होगी।
जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए प्रत्येक धान खरीदी केन्द्र हेतु खरीदी केन्द्र प्रभारी सहित नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। साथ ही धान उपार्जन कार्य की मॉनिटरिंग के लिए राजस्व, खाद्य, सहकारिता विभाग तथा मंडी बोर्ड के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों से अवैध धान की आवक को रोकने के लिए जांच चौकी स्थापित करने सहित सतत निगरानी के लिए कर्मचारियों की रोस्टर अनुसार ड्यूटी लगाई गई है। धान खरीदी केन्द्रों में बारदाने की उपलब्धता सहित अन्य व्यवस्था किया गया है। धान की खरीदी अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र के माध्यम से की जाएगी। विक्रय किए गए धान का भुगतान किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। बारदानों की व्यवस्था में नवीनता लाते हुए खरीदी 50 प्रतिशत नए और 50 प्रतिशत पुराने बारदानों में होगी। किसानों को टोकन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है। किसान सुबह 8 बजे से टोकन जारी कर सकते हैं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए अधिकतम 2 टोकन और बड़े किसानों के लिए अधिकतम 3 टोकन की सीमा तय की गई है। खरीदी केवल एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से ही की जाएगी । जिसमें वन अधिकार पट्टाधारकों को पंजीयन में छूट दी गई है । राज्य शासन द्वारा किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए टोलफ्री नम्बर 1800-233-3663 जारी किया गया है। जिसमें कृषक सम्पर्क कर अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं।


